उत्तर प्रदेश की राज्यपालआनंदीबेन पटेल की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन में जन भवन, लखनऊ में उत्तर प्रदेश राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक विरासत पर आधारित एक प्रभावशाली वृत्तचित्र (डाक्यूमेंट्री) के प्रदर्शन से हुई, जिसमें राज्य के गौरवशाली अतीत, विकास की यात्रा तथा सांस्कृतिक विविधता को सजीव रूप में प्रस्तुत किया गया एवं लखनऊ स्थित विश्वविद्यालयों के विद्यार्थीगणों द्वारा देश भक्ति व देश की संस्कृति पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुति दी गयी।इस अवसर पर राज्यपाल जी ने समस्त प्रदेशवासियों को उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि भारत भौगोलिक, प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विविधताओं से परिपूर्ण देश है, जहाँ प्रत्येक राज्य की अपनी विशिष्ट पहचान और विशेषताएँ हैं। भारत भूमि सभी राज्यों को एक सूत्र में जोड़ती है तथा हमारी अद्वितीय संस्कृति अनेकता में एकता के भाव को सशक्त करती है। इसी भावना को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की परिकल्पना प्रस्तुत की गई है, जिसने देशवासियों को विभिन्न राज्यों की संस्कृतियों, परंपराओं, इतिहास और विविधताओं से जुड़ने की प्रेरणा दी है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश आज तेजी से विकसित होता हुआ प्रदेश है, जहाँ उच्च शिक्षा, पर्यटन, संपर्क राजमार्गों, आधुनिक अवसंरचना और नवाचार के माध्यम से विकास के नए अध्याय लिखे जा रहे हैं। स्वतंत्रता संग्राम में उत्तर प्रदेश की भूमिका ऐतिहासिक रही है। वर्ष 1857 की प्रथम स्वाधीनता क्रांति का उद्घोष इसी पावन भूमि से हुआ था। जनसंख्या और संसद में प्रतिनिधित्व की दृष्टि से भी उत्तर प्रदेश देश में अग्रणी स्थान रखता है तथा इस प्रदेश ने देश को सर्वाधिक प्रधानमंत्री प्रदान करने का गौरव भी प्राप्त किया है।
राज्यपाल जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश केवल राजनीतिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और भौगोलिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण राज्य है। प्रदेश सरकार द्वारा पर्यटन की अपार संभावनाओं को दृष्टिगत रखते हुए रामायण परिपथ, बृज परिपथ, महाभारत परिपथ, आध्यात्मिक, जैन एवं बौद्ध परिपथों का विकास किया गया है। इन स्थलों के सौंदर्यीकरण के साथ-साथ यात्री सुविधाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने हेतु निरंतर कार्य किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश की एक विशिष्ट पहचान यह भी है कि यहाँ का प्रत्येक जनपद किसी न किसी विशेष उत्पाद या शिल्प कला के लिए जाना जाता है। उत्तर प्रदेश के अनेक उत्पाद आज राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी विशिष्ट पहचान बना रहे हैं। कृषि, फूड प्रोसेसिंग, डेयरी, स्टार्ट-अप, अवसंरचना विकास और रक्षा उत्पादन सहित प्रत्येक क्षेत्र में प्रदेश में अपार संभावनाएँ विद्यमान हैं।
राज्यपाल जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश साहित्य, कला, संस्कृति और परंपराओं से समृद्ध प्रदेश है। अयोध्या में नवनिर्मित श्री रामलला मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम तथा वाराणसी जैसे धार्मिक स्थल आज देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए आस्था के प्रमुख केंद्र बन चुके हैं।
उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि प्रदेश सामाजिक, स्वास्थ्य एवं शिक्षा के क्षेत्रों में निरंतर समावेशी विकास की दिशा में अग्रसर है। आंगनवाड़ी केंद्रों के सुदृढ़ीकरण, बालिकाओं के स्वास्थ्य संरक्षण, क्षय रोग उन्मूलन तथा उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार से प्रदेश के भविष्य को सशक्त आधार मिला है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में नैक मूल्यांकन में उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों का उत्कृष्ट प्रदर्शन प्रदेश की शैक्षिक उपलब्धियों को दर्शाता है। विश्वविद्यालयों द्वारा क्यूएस राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में भी सराहनीय प्रदर्शन किया जा रहा है।
स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्रदेश सरकार द्वारा सुलभ, सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं। टी.बी. उन्मूलन अभियान के अंतर्गत जनभवन, उत्तर प्रदेश की पहल से वर्ष 2019 से 2025 के मध्य 317 टी.बी. रोगियों को गोद लिया गया है तथा वर्तमान में निक्षय मित्र योजना के माध्यम से प्रदेशभर में लगभग 4 लाख रोगियों को सहयोग प्रदान किया जा रहा है।
सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम हेतु जागरूकता, जांच एवं टीकाकरण कार्यक्रमों के अंतर्गत प्रदेश में 40,000 से अधिक बालिकाओं को निःशुल्क एच.पी.वी. वैक्सीन प्रदान की गई है। इसके अतिरिक्त, जनभवन की प्रेरणादायी पहल के अंतर्गत 50,000 से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों को सशक्त बनाने हेतु आवश्यक आंगनवाड़ी किट उपलब्ध कराई गई हैं।
राज्यपाल जी ने कहा कि वर्ष 2025 उत्तर प्रदेश के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में अंकित हुआ है। लखनऊ में माननीय प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्र प्रेरणा स्थल का उद्घाटन किया गया, जहाँ डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय तथा पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की 65 फीट ऊँची कांस्य प्रतिमाएँ स्थापित की गई हैं, जो राष्ट्रनिर्माण में उनके अमूल्य योगदान की जीवंत प्रेरणा हैं। यह स्थल सभी को जाकर देेखना चाहिए।
राज्यपाल जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश आज विकास और विरासत, आधुनिकता और परंपरा के संतुलन के साथ आगे बढ़ रहा है। यह परिवर्तन दूरदर्शी नेतृत्व, सुशासन और जनभागीदारी का परिणाम है। उन्होंने वर्ष 2047 तक आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत के निर्माण में सभी से सक्रिय योगदान का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हम सभी जहाँ भी कार्यरत हैं, वहाँ यदि किसी प्रकार की बीमारी, शिक्षा, स्वास्थ्य अथवा अन्य सामाजिक समस्या सामने आती है, तो उस पर गंभीरता से विचार-विमर्श करते हुए समाधान के प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने आपसी समन्वय के साथ कार्य करने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया।
राज्यपाल जी ने जन भवन में आयोजित पशुपालन पखवाड़े का उल्लेख करते हुए कहा कि इस अवसर पर गौ-सेवा का भाव आत्मसात किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें मानवता के दृष्टिकोण से यह भी सोचना चाहिए कि भीषण ठंड में गरीब एवं वंचित वर्ग किस प्रकार जीवन यापन करता होगा। इस विषय पर संवेदनशीलता के साथ सोचने और सीखने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि “गौ-सेवा और मानव-सेवा हमारा मंत्र है” तथा जब हम गाय को माता मानते हैं, तो माता की सेवा करना भी हमारा कर्तव्य है। प्रेम और दयाभाव हमारे आचरण का अभिन्न अंग होना चाहिए।
राज्यपाल जी ने जन भवन परिसर में निर्माणाधीन आदर्श माध्यमिक विद्यालय के संदर्भ में कहा कि ऐसे गरीब एवं शिक्षा से वंचित बच्चों का नामांकन किया जाना चाहिए, जिन्हें जीवन में सभी प्रकार की सुविधाएँ प्राप्त नहीं हो पातीं। उन्होंने कहा कि इन बच्चों को अच्छी मेज, पौष्टिक भोजन, विद्यालय की ड्रेस तथा विविध रचनात्मक एवं सह-शैक्षिक गतिविधियों से जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि गुणवत्ता और प्रतिभा अमीरी-गरीबी नहीं देखती, यह गरीब और अमीर दोनों वर्गों के बच्चों में समान रूप से होती है। कुदरत किसी प्रकार का भेदभाव नहीं करती, आवश्यकता केवल इन बच्चों को सही दिशा दिखाने और उनका मार्गदर्शन करने की है।राज्यपाल जी ने कहा कि जहाँ हम कार्य करते हैं, उस स्थल की स्वच्छता हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने जन भवन परिसर में की जा रही स्वच्छता व्यवस्था की सराहना भी की।विश्वविद्यालयों के संबंध में चर्चा करते हुए राज्यपाल जी ने कहा कि यह शिक्षकों की जिम्मेदारी है कि वे ऐसा वातावरण तैयार करें, जहाँ किसी भी प्रकार की जातिगत भावना को स्थान न मिले। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में अनावश्यक बाहरी व्यक्तियों का प्रवेश नहीं होना चाहिए। राज्यपाल जी ने बेटियों को आत्मनिर्भर बनने, अपने आसपास के परिवेश के प्रति सजग रहने तथा जीवन में सोच-समझकर कदम उठाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों का मुख्य कार्य अध्ययन और चिंतन है, मन को इधर-उधर भटकाने के बजाय लक्ष्य पर केंद्रित रहना चाहिए।



