उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य की जीवनी पर आधारित महानाट्य कार्यक्रम ने बाबा विश्वनाथ की पावन धरा काशी को महाकाल की धरा उज्जैन के साथ सांस्कृतिक रूप से जोड़ते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ अभियान को आगे बढ़ाने का कार्य किया है। प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन और उनकी प्रेरणा से आज यह सांस्कृतिक बंधन इस कार्यक्रम के माध्यम से और प्रगाढ़ हो रहा है।
मुख्यमंत्री जी वाराणसी में विक्रमोत्सव-2026 के शुभारम्भ कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी एवं मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ0 मोहन यादव ने बी0एल0डब्ल्यू0 ग्राउण्ड पर आयोजित किए जा रहे तीन दिवसीय ‘महानाट्य सम्राट विक्रमादिव्य’ कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस अवसर पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को भारत की कालगणना पर आधारित 700 किलोग्राम की विक्रमादित्य वैदिक घड़ी भेंट की। यह वैदिक घड़ी श्री काशी विश्वनाथ मन्दिर में स्थापित की जाएगी।
ज्ञातव्य है कि महाराज विक्रमादित्य शोध पीठ के माध्यम से आयोजित इस महानाट्य की परिकल्पना मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ0 मोहन यादव की है। पद्मश्री डॉ0 भगवती लाल राजपुरोहित द्वारा रचित और श्री राजेश कुशवाहा द्वारा प्रस्तुत इस महानाट्य का मंचन श्री संजीव मालवी के निर्देशन में किया जा रहा है। इसमें 225 से अधिक कलाकार, हाथी-घोड़े, रथ, पालकियां, भव्य युद्ध, लाइट शो, आतिशबाजी नृत्य और महाकाल की भस्म आरती की दिव्य झलकियां शामिल रहीं। इस महानाट्य में सम्राट विक्रमादित्य के जन्म से राजतिलक तक की गाथा, विक्रम बेताल की कथा और सनातन धर्म के उत्थान की महाकाव्य कथा जीवन्त हुई है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि महाराज विक्रमादित्य नीति, शास्त्र और न्याय के पर्याय माने गए हैं। शास्त्र और कालगणना के बारे में उज्जैन की वेधशालाएं इसका उदाहरण प्रस्तुत करती हैं। भारतीय कालगणना विक्रम संवत् के आधार पर आगे बढ़ रही है। काशी पंचांग की धरती है। कालगणना की धरती उज्जैन है। इन दोनों का समावेश भारतीय कालगणना को वैश्विक मंच तक पहुंचाने में अपना योगदान देगा और सही तथ्य प्रस्तुत करेगा। वर्ष 2014 के बाद भारत के परम्परागत ज्ञान व ज्ञान-परम्परा की ताकत को आज दुनिया महसूस कर रही है। योग व आयुष इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि महाकाल की कृपा हर उस व्यक्ति पर बरसती है, जो काल की गति को पहचान कर उसके अनुरूप अपने आपको तैयार करता है। शैव परम्परा की महत्वपूर्ण नगरी काशी में माँ गंगा के तट पर इस महानाट्य रूपान्तरण की प्रथम प्रस्तुति अत्यन्त प्रासंगिक है, क्योंकि नाथ सम्प्रदाय में दीक्षित महाराज भर्तृहरि और महाराज विक्रमादित्य का सम्बन्ध भाई-भाई का था। महाराज भर्तृहरि की दीक्षा भूमि उज्जैन थी, किन्तु उनकी साधना भूमि चुनार थी। चुनार किले का सम्बन्ध महाराज भर्तृहरि से है। उत्तर प्रदेश सरकार चुनार किले के पुनरुद्धार व सौन्दर्यीकरण के कार्यों को आगे बढ़ा रही है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि यह कार्यक्रम केवल महानाट्य का रूपान्तरण नहीं है, बल्कि वर्तमान पीढ़ी को अपने मूल्यों और आदर्शों से जोड़ने के एक वृहद अभियान का हिस्सा भी है। सिनेमा एवं कला की विभिन्न विधाएं तत्कालीन समाज का आइना होती हैं, जो समाज को दिशा देने का कार्य भी करती हैं। इनको वर्तमान पीढ़ी जैसा देखेगी, वैसे ही बनेगी। इसलिए कला जगत से जुड़े लोग ऐसी फिल्में बनाएं, जो राष्ट्र के लिए प्रेरणादायी हों। आज भारतीय सिनेमा ने भारत के मूल्यों एवं आदर्शों को प्रस्तुत किया है और देशवासियों ने इसे अंगीकार भी किया।
नये भारत में आप सब देख रहे होंगे कि डकैतों, गलत व्यक्तियों को भारत ने दुत्कारा है। एक समय था, जब अच्छे पात्रों को खलनायक के रूप में और खलनायकों को नायक के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास हुआ। परिणामस्वरूप अन्याय, अत्याचार, शोषण के खिलाफ हमारा प्रतिकार कमजोर हुआ। हमें इन चीजों से बचना होगा। किसी गलत व्यक्ति को हीरो के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।
भारत की विरासत से जुड़े स्थान आज दुनिया को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। कुम्भ की परम्परा हमारे यहां हजारों वर्षों से थी, लेकिन प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में प्रयागराज कुम्भ-2019 व प्रयागराज महाकुम्भ-2025 ने दुनिया को अपनी ओर आकर्षित किया। प्रयागराज महाकुम्भ-2025 में देश एवं दुनिया से 66 करोड़ श्रद्धालु आए। वाराणसी में श्री काशी विश्वनाथ धाम बनने के बाद करोड़ों श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ का दर्शन कर रहे हैं, माँ गंगा का आशीर्वाद ले रहे हैं। आज काशी विरासत और विकास को एक साथ लेकर चल रही है।
सनातन धर्मावलम्बियों का 500 वर्षों का इंतजार समाप्त हुआ है। अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर का निर्माण आज आप सबके सामने है, जो पूरी दुनिया को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। अयोध्या का सम्बन्ध भी उज्जैन से है। वर्तमान अयोध्या को 02 हजार वर्ष पहले महाराज विक्रमादित्य ने ही ढूंढा था। उसकी अपनी गाथा व कथा है। महाराज विक्रमादित्य ने इसके शास्त्रीय प्रमाण भी प्रस्तुत किए थे। वह सभी आज भी मौजूद हैं। लव के बाद भगवान श्रीराम का मंदिर सबसे पहले महाराज विक्रमादित्य ने ही बनवाया था।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ0 मोहन यादव ने अपने सम्बोधन में कहा कि सम्राट विक्रमादित्य भारतीय इतिहास के ऐसे महान शासक थे, जिनकी कीर्ति आज भी जनमानस में जीवित है। विक्रमादित्य का नाम न्याय और पराक्रम का पर्याय है। उनके जीवन पर आधारित यह मंचन न केवल मनोरंजक है, बल्कि शिक्षाप्रद भी है। उन्होंने इस आयोजन के लिए उत्तर प्रदेश सरकार और आयोजकों की सराहना की। माँ गंगा के तीरे महान् सम्राट विक्रमादित्य के जीवन पर आधारित नाट्य कार्यक्रम की प्रस्तुति सारगर्भित है। भाईयों की तीन जोड़ियों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि श्रीराम व लक्ष्मण जी, श्रीकृष्ण व बलदाऊ जी तथा भर्तृहरि एवं विक्रमादित्य की जोड़ियां देश ही नहीं दुनिया में प्रसिद्ध हैं। मध्य प्रदेश सरकार उत्तर प्रदेश सरकार के साथ पर्यटन एवं संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए मिलकर कार्य कर रही हैं। प्रधानमंत्री जी के दिशा-निर्देशन में बेतवा नदी को भी जोड़ने का कार्य मध्य प्रदेश सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार के साथ मिलकर किया जा रहा है।
इस अवसर पर एम0एस0एम0ई0 मंत्री श्री राकेश सचान, श्रम एवं सेवायोजन मंत्री श्री अनिल राजभर, स्टाम्प तथा न्यायालय शुल्क एवं पंजीयन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री रवीन्द्र जायसवाल, वाराणसी के महापौर श्री अशोक तिवारी सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण, महानाट्य से जुड़े कलाकार व अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।




