मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने आज यहाँ अपने सरकारी आवास पर आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में प्रदेश के भविष्य की अर्थव्यवस्था से जुड़े तीन महत्वपूर्ण विषयों, उत्तर प्रदेश डाटा सेण्टर क्लस्टर (यू0पी0डी0सी0सी0), प्रोजेक्ट गंगा तथा गेहूँ के इन-हाउस प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए मण्डी शुल्क एवं मण्डी सेस में सम्भावित छूट की समीक्षा की।
मुख्यमंत्री जी ने यू0पी0 डाटा सेण्टर क्लस्टर (यू0पी0डी0सी0सी0) की समीक्षा करते हुए कहा कि यह परियोजना उत्तर प्रदेश के ए0आई0 मिशन की बुनियादी संरचना तैयार करेगी। डाटा सेण्टर क्लस्टर केवल एन0सी0आर0 क्षेत्र तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि प्रदेश के अन्य हिस्सों को भी इससे जोड़ा जाए। इसकी शुरुआत बुन्देलखण्ड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) क्षेत्र से की जा सकती है, जहाँ बड़े पैमाने पर भूमि उपलब्ध है। टाटा समूह सहित बड़ी टेक कम्पनियों से संवाद स्थापित कर लखनऊ को ‘ए0आई0 सिटी’ के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य किया जाए।
बैठक में मुख्यमंत्री जी को अवगत कराया गया कि उत्तर प्रदेश डाटा सेण्टर क्लस्टर, प्रदेश को भारत और ग्लोबल साउथ का सबसे बड़ा ए0आई0 कम्प्यूट पावर सेण्टर बनाने की दीर्घकालिक रणनीति है। इसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश को आर्टिफिशियल इण्टेलिजेंस, डेटा सेण्टर, क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर और हाई-टेक डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग का वैश्विक केन्द्र बनाना है। यह केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि अगले 50 वर्षों के लिए उत्तर प्रदेश की नई आर्थिक संरचना का खाका है। इसके तहत वर्ष 2040 तक 05 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था, 1.5 लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार और 05 गीगावॉट ए0आई0 कम्प्यूट कॉरिडोर विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।
वर्ष 2040 तक दुनिया की नई अर्थव्यवस्था ए0आई0, क्लाउड, साइबर सिक्योरिटी, सेमीकण्डक्टर, इलेक्ट्रिक व्हीकल, रोबोटिक्स और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे ‘फ्यूचर एरेना’ के इर्द-गिर्द विकसित होगी, जिनका संयुक्त वैश्विक बाजार 29 से 48 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँच सकता है। भारत के लिए ए0आई0 सॉफ्टवेयर एण्ड सर्विसेज, क्लाउड सर्विसेज, साइबर सिक्योरिटी, सेमीकण्डक्टर्स, एयरोस्पेस और ई0वी0 जैसे सेक्टर भविष्य के प्रमुख आर्थिक इंजन होंगे।
बैठक में उत्तर प्रदेश की पाँच प्रमुख संरचनात्मक ताकतों-भौगोलिक स्थिति, विशाल भूमि उपलब्धता, बड़ी युवा आबादी, तेजी से विकसित हो रहा इन्फ्रास्ट्रक्चर और मजबूत नेतृत्व को रेखांकित किया गया। उत्तर प्रदेश का इनलैण्ड लोकेशन इसे समुद्री जोखिमों और चक्रवातों से सुरक्षित बनाता है, जबकि एक्सप्रेस-वे, एयरपोर्ट, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और पावर इन्फ्रास्ट्रक्चर पहले से तेजी से विकसित हो रहे हैं। आई0आई0टी0 कानपुर, एन0आई0टी0 प्रयागराज और 50 से अधिक इंजीनियरिंग संस्थानों के कारण राज्य में विशाल तकनीकी प्रतिभा उपलब्ध है।
बैठक में उत्तर प्रदेश को ‘एशिया का मोस्ट सिक्योर, स्केलेबल एवं कनेक्टेड इनलैण्ड ए0आई0 टेरिटरी’ बताया गया। देश के लगभग सभी प्रमुख फाइबर नेटवर्क यू0पी0 से होकर गुजरते हैं और राज्य भारत के सभी समुद्री केबल लैण्डिंग प्वाइण्ट्स से जुड़ा हुआ है। राज्य के भीतर 05 मिलीसेकण्ड से कम लेटेन्सी तथा मुम्बई और चेन्नई जैसे डिजिटल हब तक 5-12 मिलीसेकण्ड कनेक्टिविटी उपलब्ध है। वैश्विक टेक कम्पनियों के लिए यू0पी0 कम लागत, बेहतर स्केलेबिलिटी और अधिक नेटवर्क रिडण्डेंसी वाला आदर्श ए0आई0 इन्फ्रास्ट्रक्चर हब है।
मुख्यमंत्री जी ने ‘प्रोजेक्ट गंगा’ यानी गवर्नेण्ट असिस्टेड नेटवर्क फॉर ग्रोथ एंड एडवांसमेण्ट की समीक्षा करते हुए कहा कि जिन युवाओं को डिजिटल उद्यमी के रूप में चुना जाए, उन्हें गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण दिया जाए। सर्वेक्षण कार्य करने वाली कम्पनियाँ भी इन युवाओं का उपयोग कर सकें, ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए। उन्होंने ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क के तेजी से विस्तार और कार्यों में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर बल देते हुए कहा कि शुरुआत से ही डिजिटल उद्यमियों को उचित इन्सेंटिव उपलब्ध कराए जाएं।
बैठक में मुख्यमंत्री जी को अवगत कराया गया कि प्रोजेक्ट गंगा ग्रामीण उत्तर प्रदेश में हाई-स्पीड ब्रॉडबैण्ड नेटवर्क पहुँचाने की महत्वाकांक्षी पहल है। इसका उद्देश्य केवल इण्टरनेट उपलब्ध कराना नहीं बल्कि टेलीमेडिसिन, डिजिटल शिक्षा, स्किल डेवलपमेण्ट, ई-गवर्नेंस, डिजिटल रोजगार और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देना है। परियोजना के तहत 10 हजार से अधिक युवाओं को डिजिटल सर्विस प्रोवाइडर (डी0एस0पी0) के रूप में विकसित करने का लक्ष्य है, जिससे लगभग 50 हजार प्रत्यक्ष और 01 लाख से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने का अनुमान है।
योजना के तहत 20 लाख से अधिक घरों को फाइबर आधारित हाई-स्पीड इण्टरनेट नेटवर्क से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। प्रत्येक डी0एस0पी0 अपने क्षेत्र में 200 से 300 घरों को कनेक्ट कर सकेगा। महिला उद्यमिता को भी विशेष प्राथमिकता दी गई है और लगभग 50 प्रतिशत महिला उद्यमियों को जोड़ने का लक्ष्य तय किया गया है।
केवल मोबाइल इण्टरनेट के जरिए सीमित सेवाएँ सम्भव हैं, जबकि वास्तविक डिजिटल परिवर्तन के लिए हाई-स्पीड ब्रॉडबैण्ड आवश्यक है। ए0आई0 आधारित कृषि, ड्रोन मॉनिटरिंग, स्मार्ट विलेज, वर्चुअल लैब, टेलीमेडिसिन और क्लाउड कम्प्यूटिंग जैसी सेवाओं के लिए मजबूत डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर को जरूरी बताया गया।
प्रोजेक्ट गंगा के तहत डी0एस0पी0 केवल इण्टरनेट सेवा प्रदाता नहीं होंगे, बल्कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं का सम्पूर्ण नेटवर्क विकसित करेंगे। वे हाई-स्पीड ब्रॉडबैण्ड, आई0पी0टी0वी0, ओ0टी0टी0 एक्सेस, सी0सी0टी0वी0 समाधान, पब्लिक वाई-फाई, साइबर सिक्योरिटी और एण्टरप्राइज कनेक्टिविटी जैसी सेवाएँ प्रदान करेंगे। योजना के तहत प्रत्येक डी0एस0पी0 को 05 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। परियोजना फिलहाल 21 प्राथमिक जिलों में ‘प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट’ के रूप में शुरू करने की तैयारी में है और इसके बाद इसे पूरे प्रदेश में विस्तार दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री जी ने गेहूँ के इन-हाउस प्रसंस्करण को बढ़ावा देने की रणनीति की समीक्षा करते हुए मण्डी टैक्स और मण्डी शुल्क व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की मण्डियों को आधुनिक, स्वच्छ और आकर्षक बनाया जाना चाहिए। मण्डियों में साफ-सफाई, रंगाई-पुताई, पर्वों के दौरान लाइटिंग, अतिक्रमण हटाने और बेहतर प्रबन्धन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
मुख्यमंत्री जी ने अल नीनो के सम्भावित प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि आगामी वर्षों में फसलों पर इसका असर पड़ सकता है, इसलिए प्रदेश को खाद्यान्न सुरक्षा के लिए अभी से तैयार रहना होगा। उन्होंने कहा कि राज्य के खाद्यान्न भण्डार पर्याप्त और मजबूत होने चाहिए।
बैठक में अवगत कराया गया कि उत्तर प्रदेश, देश का सबसे बड़ा गेहूँ उत्पादक राज्य है। वर्ष 2025-26 में प्रदेश में 372 लाख मीट्रिक टन गेहूँ उत्पादन का अनुमान है, जबकि कुल उपलब्धता 407 लाख मीट्रिक टन तक पहुँचती है। प्रदेश में लगभग 2.88 करोड़ किसान गेहूँ उत्पादन से जुड़े हैं। इसके बावजूद सीमित प्रसंस्करण क्षमता के कारण बड़ी मात्रा में गेहूँ कच्चे अनाज के रूप में दूसरे राज्यों में चला जाता है, जिससे मूल्य संवर्धन, जी0एस0टी0 राजस्व और रोजगार के अवसर प्रदेश से बाहर चले जाते हैं।
प्रदेश में 559 रोलर फ्लोर मिल्स हैं, जिनकी कुल मिलिंग क्षमता 218.4 लाख मीट्रिक टन है, लेकिन वास्तविक उपयोग केवल 126.45 लाख मीट्रिक टन तक सीमित है। इसके अलावा, 40 हजार से अधिक आटा चक्कियांँ भी संचालित हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि यदि राज्य के भीतर ही गेहूँ प्रसंस्करण को बढ़ावा मिले तो रोजगार, बिजली खपत, जी0एस0टी0 संग्रह और खाद्य उद्योगों में बड़ा विस्तार हो सकता है। समिति ने सुझाव दिया कि उत्तर प्रदेश में पंजीकृत मिलों द्वारा राज्य के भीतर प्रसंस्करण हेतु खरीदे गए गेहूँ पर मण्डी शुल्क एवं विकास उपकर में छूट दी जाए, लेकिन व्यापारिक गतिविधियों पर यह छूट लागू न हो।




