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Lakhimpur :पुलिस मालखाने से एक करोड़ के जेवर गायब, न्यायालय ने दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई के दिये आदेश..

लखीमपुर खीरी ( सुरजीत चानी ,संवाददाता ): लखीमपुर खीरी से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां पुलिस मालखाने में जमा करीब एक करोड़ रुपये मूल्य के सोने-चांदी के जेवर गायब होने का मामला उजागर हुआ है। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि “सोना पानी में नहीं गलता” और जेवरों के गायब होने को गंभीर लापरवाही माना। अदालत ने दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने और पीड़ित को उचित मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं।
मामला लखीमपुर खीरी जिले के पुलिस मालखाने से जुड़ा है, जहां एक आपराधिक मामले में बरामद किए गए लाखों रुपये के सोने-चांदी के जेवर सुरक्षित रखे गए थे। लेकिन जब अदालत में जेवरों को प्रस्तुत करने की बात आई तो मालखाने से वे गायब मिले। इस पर अदालत ने संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया।
सुनवाई के दौरान पुलिस की ओर से जेवरों के खराब होने और नष्ट हो जाने जैसी दलीलें दी गईं, लेकिन अदालत ने इस तर्क को खारिज करते हुए सख्त टिप्पणी की कि “सोना पानी में नहीं गलता”। अदालत ने माना कि यह मामला महज लापरवाही नहीं बल्कि गंभीर जिम्मेदारीहीनता का प्रतीक है।
अदालत ने पूरे मामले की जांच कर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं। साथ ही पीड़ित पक्ष को हुए नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजा देने के भी निर्देश जारी किए हैं। अदालत के इस फैसले के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
हालांकि पुलिस ने सदर मालखाने से मुकदमे से संबंधित जेवरात गायब होने से संबंधित प्रसारित खबर के संबंध में पुलिस ने एक प्रेस नोट जारी करते हुए कहा हैं कि तात्कालीन हेड मोहर्रिर की तहरीर पर इस प्रकरण में मुकदमा पंजीकृत कर विवेचना की गई थी। जांच में यह तथ्य सामने आया था कि मृतका के शव से प्राप्त कपड़ों व गहनों की एक पीएम पोटली मालखाने में जमा कराई गई थी।उक्त पीएम पोटली का प्रभार तात्कालीन हेड मोहर्रिर के पास था। दुर्भाग्यवश हेड मोहर्रिर की वर्ष 2009 में मृत्यु हो गई थी तथा उनके बाद नियुक्त रहे हेड मोहर्रिर का भी निधन हो गया था तथा इनके पश्चात नियुक्त हुए हेड मोहर्रिर को इस पोटली का चार्ज नहीं प्राप्त हुआ। जाँच से यह पूर्णतः प्रमाणित हो चुका हैं कि उक्त पीएम पोटली दोनों हेड मोहर्रिर की नियुक्ति अवधि के दौरान ही सदर मालखाने से गायब हुई थी।चूंकि इस प्रकरण में उत्तरदायी दोनों कर्मचारियों की मृत्यु हो चुकी तो विधिक रूप से मृत व्यक्तियों के विरुद्ध कोई भी अभियोग चलाना जाना संभव नहीं हैं।
अतः इस अभियोग की विवेचना जरिए अंतिम रिपोर्ट न्यायालय में प्रेषित कर समाप्त की जा चुकी हैं।