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Lucknow : स्वामी प्रसाद मौर्य के उस एक बयान से भड़के अखिलेश, कहा- “इग्नोर करो, हमारे गठबंधन में नहीं हैं”

लखनऊ ( अमित श्रीवास्तव ,विशेष संवाददाता): उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले INDIA गठबंधन में दरार दिखने लगी है। अपनी जनता पार्टी (AJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस आमने-सामने आ गई हैं।

दरअसल, 3 अक्टूबर को स्वामी प्रसाद मौर्य ने दिल्ली में 10 जनपथ पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की थी और अपनी पार्टी के INDIA गठबंधन में शामिल होने का ऐलान किया था। उन्होंने कहा था कि उनका लक्ष्य भाजपा को हटाना और संविधान बचाना है। 3f04

किस बयान पर भड़के अखिलेश?

स्वामी प्रसाद मौर्य ने सपा छोड़ने के बाद लगातार अखिलेश यादव की PDA राजनीति पर हमला बोला था। उनका सबसे विवादित बयान था:

> “अखिलेश यादव PDA में D का मतलब कभी दलित बताते हैं तो कभी डिंपल यादव। जिस पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वयं कंफ्यूज हो, वह अपनी पार्टी और प्रदेश को क्या दिशा दे सकता है?” 8863

इसी बयान के बाद से अखिलेश और स्वामी के रिश्तों में कड़वाहट और बढ़ गई। मौर्य ने यह भी कहा था कि अखिलेश कभी P का मतलब पिछड़ा तो कभी पंडित बताते हैं। 8863

अखिलेश ने क्या जवाब दिया?

लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब पत्रकारों ने पूछा कि क्या स्वामी प्रसाद मौर्य महागठबंधन में शामिल हो सकते हैं, तो अखिलेश यादव ने गुस्से में दो टूक जवाब दिया –

“हमारे गठबंधन में शामिल नहीं होंगे। हमारी सीटों की गिनती में भी शामिल नहीं हैं। क्यों आप बेवजह बहस छेड़ते हैं। इग्नोर करो।” 9f71

इससे पहले भी एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था – “Avoid him. Ignore him. Keep quiet.” 20d6

कांग्रेस कर रही स्वागत, सपा कर रही किनारा

जहां अखिलेश मौर्य के लिए दरवाजे बंद कर रहे हैं, वहीं कांग्रेस उनका स्वागत कर रही है। यूपी कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने कहा – “जो कोई भी INDIA गठबंधन को मजबूत करना चाहता है, उसका स्वागत है, ये अखिलेश की निजी राय हो सकती है”। 6d5a

सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस स्वामी को अपनी 10 सीटें देने को तैयार है, वह भी कांग्रेस के चुनाव चिन्ह पर। 0f8a

पूरा विवाद क्या है?

2022 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले स्वामी प्रसाद मौर्य योगी कैबिनेट छोड़कर सपा में आए थे, उन्हें राष्ट्रीय महासचिव और MLC बनाया गया। फिर 13 फरवरी 2024 को उन्होंने राष्ट्रीय महासचिव पद से और 20 फरवरी 2024 को सपा से ही इस्तीफा दे दिया। आरोप लगाया था कि अखिलेश समाजवादी विचारधारा से भटक गए हैं और उन्होंने इस्तीफा भेजने के बाद भी उनसे बात करना मुनासिब नहीं समझा। 20d6

तभी से दोनों नेताओं के बीच जुबानी जंग जारी है।