करवा चौथ का पावन पर्व इस साल 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार को मनाया जाएगा। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन के लिए निर्जला व्रत रहती हैं और रात में चंद्रमा के दर्शन करके अपना व्रत खोलती हैं। इस पावन अवसर पर व्रती महिलाओं के मन में पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, सरगी, कथा और चंद्रोदय के समय को लेकर कई सवाल रहते हैं। आइए इस लेख में इन सभी सवालों के सटीक और विस्तृत जवाब जानते हैं। जिससे आपकी करवा चौथ से जुड़ी सारी कन्फ्यूजन दूर हो जाएगी
1. करवा चौथ क्या है? (हिंदू मान्यता)
कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाने वाला करवा चौथ हिंदू धर्म में पति की लंबी आयु, स्वास्थ्य और अखंड सौभाग्य के लिए रखा जाने वाला सबसे कठिन निर्जला व्रत है। इस दिन माता पार्वती, भगवान शिव, कार्तिकेय, गणेश और चंद्र देव की पूजा की जाती है। लखनऊ में इसे “करक चतुर्थी” के नाम से भी जाना जाता है।
2. लखनऊ में करवा चौथ कैसे मनाया जाता है – पूरा विधि विधान
सुबह – व्रत का संकल्प:
लखनऊ के हिंदू घरों में महिलाएं ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करके साफ लाल वस्त्र पहनती हैं। मांग में सिंदूर, हाथों में मेहंदी और सोलह श्रृंगार करके हाथ में जल, अक्षत लेकर पति की लंबी उम्र का संकल्प लेती हैं।
यहां सर्गी नहीं होती, सीधे सूर्योदय से निर्जला व्रत शुरू होता है – बिना अन्न और जल के।
दिन भर – सोलह श्रृंगार और मेहंदी:
दिन भर महिलाएं घर के कामों के साथ सोलह श्रृंगार करती हैं। लखनऊ में इस दिन के लिए खास है:
– चौक की लाल चिकनकारी साड़ी: लखनऊ की महिलाएं इस दिन लाल या मेहरून रंग की चिकनकारी साड़ी पहनना शुभ मानती हैं।
– मेहंदी: हाथों पर शिव-पार्वती और करवा चौथ के प्रतीक बनवाए जाते हैं।
– बायना / बायना निकालना: शाम की पूजा के लिए महिलाएं मिट्टी के करवे, गेहूं, मिठाई और बायना तैयार करती हैं जो अपनी सास या जेठानी को दिया जाता है।
शाम – करवा चौथ की कथा और पूजन:
लखनऊ में शाम 5 बजे मोहल्ले की सभी महिलाएं एक जगह एकत्र होती हैं। बीच में करवा माता की चौकी सजाई जाती है।
पूजन सामग्री: मिट्टी का टोंटीदार करवा, करवा पर लगा ढक्कन, दीपक, रोली, अक्षत, फूल, मिठाई, और करवा चौथ की व्रत कथा की किताब।
पंडित जी या घर की बड़ी बुजुर्ग महिला करवा चौथ की प्रामाणिक कथा सुनाती हैं – वीरवती की कथा और करवा माता की कथा। कथा के दौरान सभी महिलाएं हाथ में रोली, अक्षत और फूल लेकर कथा सुनती हैं और बीच-बीच में करवे को घुमाती हैं।
रात – चंद्र दर्शन और व्रत खोलना:
रात को चंद्रमा निकलने पर महिलाएं छत पर जाती हैं। यह सबसे महत्वपूर्ण पूजा है।
1. छलनी में दीपक रखकर पहले चंद्रमा को देखा जाता है
2. फिर उसी छलनी से अपने पति को देखा जाता है
3. पति अपनी पत्नी को जल पिलाकर और मिठाई खिलाकर व्रत खुलवाते हैं
4. पत्नी पति के पैर छूकर आशीर्वाद लेती है
लखनऊ में चंद्रमा के दर्शन के लिए जनेश्वर मिश्र पार्क और गोमती नगर की छतें सबसे प्रसिद्ध हैं।
लखनऊ में करवा चौथ की खास बात
यहां पूजा में दिखावा नहीं, भक्ति और शुद्धता है। कोई सर्गी, कोई फिल्मी गाना नहीं, केवल शिव-पार्वती के मंत्र, करवा माता की कथा और पति-पत्नी के अटूट विश्वास का पर्व।
अमित श्रीवास्तव,विशेष संवाददाता की खास रिपोर्ट




