नई दिल्ली ( राजू ,स्टेट हेड ):भारत के कानूनी और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर स्थापित करते हुए, अधिवक्ता डॉ. सुचिस्मिता भुइयां द्वारा लिखित पुस्तक ‘साइबर लॉ कन्वर्जेंस: ए कंपेरेटिव स्टडी ऑफ इंडियन एंड यूएसए लॉ’ (Cyberlaw Convergence: A Comparative Study of Indian and USA Law) का कल राजधानी नई दिल्ली में औपचारिक विमोचन किया गया। यह भारत में पहली बार है जब कोई व्यापक कानूनी अध्ययन दुनिया के दो सबसे बड़े डिजिटल लोकतंत्रों के साइबर कानूनों का एक साथ तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करता है।
पुस्तक का आधिकारिक विमोचन दिल्ली उच्च न्यायालय के माननीय न्यायाधीश जस्टिस तेजस कारिया द्वारा किया गया, जिन्होंने डॉ. भुइयां के इस शोध पूर्ण कार्य की भूरि-भूरि प्रशंसा की। इस उच्च स्तरीय विमोचन समारोह में प्रमुख कानूनी और आध्यात्मिक हस्तियां उपस्थित रहीं, जिनमें सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष व वरिष्ठ अधिवक्ता आदिश सी. अग्रवाल; दिल्ली बार काउंसिल के पूर्व अध्यक्ष श्री के.के. मनन; सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व उपाध्यक्ष व वरिष्ठ अधिवक्ता सुकुमार पट्टेजोशी; और आदि शंकराचार्य वैदिक वेलनेस फाउंडेशन के संस्थापक योगी आशुतोष महाराज जी शामिल थे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. भुइयां ने जोर देकर कहा कि उनकी यह पुस्तक कॉर्पोरेट दिग्गजों के बजाय आम नागरिकों की सुरक्षा की भावना से प्रेरित है। उन्होंने रेखांकित किया कि एक सिंगल फिशिंग लिंक (Phishing Link) कुछ ही सेकंड में किसी परिवार की जीवन भर की कमाई उड़ा सकता है, जिससे साइबर सुरक्षा केवल एक तकनीकी खराबी न रहकर एक गहरा मानवीय मुद्दा बन जाती है।
भारत के केंद्रीकृत कानूनी ढांचे और अमेरिका के क्षेत्र-विशिष्ट (Sector-specific) मॉडल के बीच अंतर को स्पष्ट करने के अलावा, ‘साइबर लॉ कन्वर्जेंस’ जेनेरेटिव एआई (Generative AI) और डीपफेक (Deepfakes) जैसे आधुनिक खतरों से निपटने के लिए भारत के साइबर कानूनों को अपडेट करने का एक व्यावहारिक रोडमैप प्रदान करती है। डॉ. भुइयां ने इस परस्पर जुड़ी दुनिया में आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए पुराने कानूनों को सरल नियमों से बदलने, जिला-स्तरीय फॉरेंसिक लैब की स्थापना, बेहतर सीमा-पार साक्ष्य संधियों और व्यापक सार्वजनिक डिजिटल साक्षरता का आह्वान किया।



