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Ayodhya : राज्यपाल ने अयोध्या धाम में नवनिर्मित दो आंगनबाड़ी केंद्रों एवं स्मार्ट क्लास रूम का उद्घाटन किया

उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने आज राज्य स्मार्ट सिटी मिशन योजना के अंतर्गत अयोध्या धाम क्षेत्र में ब्रह्मकुण्ड गुरुद्वारे के निकट मोहल्ला दोराही कुआँ में नवनिर्मित दो आंगनबाड़ी केंद्रों एवं स्मार्ट क्लास रूम का उद्घाटन किया।
राज्यपाल जी ने आंगनबाड़ी केंद्रों की बाल वाटिकाओं का अवलोकन किया तथा बच्चों के साथ संवाद किया। उन्होंने बच्चों से प्रार्थना सुनी और स्मार्ट क्लास के माध्यम से प्रदान की जा रही शिक्षा के संबंध में जानकारी प्राप्त की। इस अवसर पर उन्होंने बच्चों को फल एवं मिष्ठान वितरित किए। राज्यपाल महोदया ने रसोईघर का निरीक्षण करते हुए बच्चों के लिए तैयार किए जा रहे मिड-डे मील का भी जायजा लिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल जी ने कहा कि भारत का उज्ज्वल भविष्य आज के नन्हे-मुन्ने बच्चों के हाथों में है। उनके समुचित शारीरिक, मानसिक एवं बौद्धिक विकास के लिए प्रारंभिक अवस्था में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, उत्तम संस्कार तथा संतुलित पोषण अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि बच्चे की प्रथम शिक्षिका उसकी माँ होती है तथा उसके बाद आंगनबाड़ी केंद्र उसके व्यक्तित्व निर्माण की महत्वपूर्ण आधारशिला बनते हैं। यही प्रारंभिक शिक्षा आगे चलकर विद्यालय, महाविद्यालय और विश्वविद्यालय तक पहुँचने का सुदृढ़ आधार बनती है।
राज्यपाल जी ने गर्भवती महिलाओं के स्वास्थय एवं पोषण पर विशेष बल देते हुए कहा कि स्वस्थ एवं संस्कारित समाज की नींव गर्भकाल से ही रखी जाती है। परिवार का दायित्व है कि गर्भवती महिला को पौष्टिक आहार, सकारात्मक वातावरण तथा समय-समय पर आवश्यक चिकित्सकीय सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँ। उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक गर्भवती महिला का अस्पताल में पंजीकरण सुनिश्चित कराया जाए तथा सभी प्रसव संस्थागत रूप से अस्पतालों में ही कराए जाएँ।
राज्यपाल जी ने अभिभावकों से अपील की कि नवजात शिशुओं को जन्म के बाद छह माह तक केवल मातृ दुग्ध ही पिलाया जाए। उन्होंने प्रत्येक वार्ड में चार-पाँच महिला एवं पुरुषों की समिति गठित कर घर-घर संपर्क स्थापित करने तथा तीन वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके प्रत्येक बच्चे का आंगनबाड़ी केंद्र में नामांकन सुनिश्चित कराने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि तीन से छह वर्ष तक के बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों में गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा एवं समुचित पोषण उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि विभिन्न सर्वेक्षणों से यह स्पष्ट हुआ है कि आठ वर्ष की आयु तक बच्चे लगभग 80 प्रतिशत सीखने की क्षमता विकसित कर लेते हैं। इसलिए इस अवस्था में उन्हें उत्तम संस्कार, नैतिक शिक्षा, योग, पर्यावरण संरक्षण, प्रार्थना, गीत-संगीत तथा अनुशासित जीवनशैली का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को नियमित रूप से आंगनबाड़ी केंद्र भेजने तथा यह सुनिश्चित करने के लिए प्रेरित किया कि नामांकित कोई भी बच्चा अनुपस्थित न रहे।
इस अवसर पर जनपद के अधिकारियों सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियाँ, अभिभावक तथा गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।