योगी सरकार के तीसरे मंत्रिमंडल विस्तार को एक हफ्ता गुजर चुका है, लेकिन नए मंत्रियों को अब तक विभाग नहीं मिल पाए हैं। सत्ता के गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा PWD, नगर विकास और डिप्टी सीएम के पोर्टफोलियो को लेकर चल रही है। बताया जा रहा है कि इन अहम विभागों के बंटवारे पर दिल्ली आलाकमान और लखनऊ के बीच सहमति बनने में देरी हो रही है।
सूत्रों के मुताबिक, मामला सिर्फ विभाग आवंटन का नहीं, बल्कि सरकार और संगठन के बीच “पावर बैलेंस” साधने का भी है। खास तौर पर PWD और नगर विकास जैसे बड़े बजट वाले विभागों को लेकर कई स्तर पर मंथन जारी है। वहीं डिप्टी सीएम के विभागों में संभावित फेरबदल की चर्चा ने राजनीतिक हलकों में अटकलें और तेज कर दी हैं।
मंत्रिमंडल विस्तार के तुरंत बाद विभागों के ऐलान की उम्मीद थी, लेकिन बढ़ती देरी यह संकेत दे रही है कि अंदरखाने समीकरण अभी पूरी तरह फिट नहीं बैठ पाए हैं। भाजपा संगठन भी 2027 के चुनावी समीकरणों को ध्यान में रखकर हर फैसले को संतुलित तरीके से लेना चाहता है।




