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Special Story : बड़ी चुनौती -क्या पूर्वांचल में भगवा का रंग ‘चटख’ करेंगे राजभर—!

लखनऊ ( DNM NETWORK): सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और जहूराबाद से विधायक ओमप्रकाश राजभर मंगलवार को दूसरी बार योगी सरकार का हिस्सा बन ही गए। उन्हें भी इस दिन की काफी समय से प्रतीक्षा थी। आखिरकार उनका ये सपना भी पूरा हो गया। योगी कैबिनेट में उन्हें मंत्री पद मिला और साथ ही लोकसभा चुनाव में अहम जिम्मेदारी भी पूर्वांचल में करीब तीन से चार प्रतिशत मतदाताओं वाली राजभर बिरादरी पर पकड़ रखने वाले राजभर आसन्न लोकसभा चुनाव में राजग के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं। हालांकि 2022 के विधानसभा चुनाव में राजभर वोट पोलिंग कुल मतदान के सापेक्ष 1.36 प्रतिशत ही रहा है।
ओमप्रकाश राजभर 2022 में गाजीपुर के जहूराबाद क्षेत्र से दूसरी बार विधायक चुने गए थे। 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। तब जनपद में भाजपा ने तीन, सुभासपा ने दो और सपा ने दो सीटें जीती थीं। पहली बार वह कैबिनेट मंत्री भी बने थे।
ओमप्रकाश राजभर 2017 से 2019 तक मंत्री रहने के बाद लोकसभा चुनाव से ठीक पहले गठबंधन से अलग हो गए और सपा से हाथ मिला लिया। 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा के साथ गठबंधन में शामिल होकर चुनाव मैदान में उतरे और भाजपा को पूर्वांचल में नुकसान पहुंचाया था।
गाजीपुर की सभी सातों विधानसभा सीटों पर सुभासपा-सपा गठबंधन को जीत मिली थी। जिले में भाजपा का खाता भी नहीं खुला था। हालांकि बाद में सपा से उनकी दूरियां बढ़ने लगीं और पिछले साल वह एक बार फिर राजग का हिस्सा बन गए।
ओमप्रकाश राजभर के सामने सबसे बड़ी चुनौती गाजीपुर सीट पर राजग के प्रत्याशी को जीत दिलाने की होगी। हालांकि उनका विधानसभा क्षेत्र जहूराबाद भले ही गाजीपुर में है, लेकिन वह बलिया संसदीय सीट का हिस्सा है। गाजीपुर सीट से सपा ने अफजाल अंसारी को प्रत्याशी घोषित किया है।
अफजाल का भतीजा और मुख्तार अंसारी का बेटा अब्बास अंसारी सुभासपा से ही मऊ सदर सीट से विधायक है। आचार संहिता उल्लंघन मामले में फिलहाल अब्बास जेल में है। पिछले लोकसभा व विधानसभा चुनाव में हार का मुंह देख चुकी भाजपा का झंडा जनपद में बुलंद करने की चुनौती ओमप्रकाश राजभर के सामने है।