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गोरखपुर…विकास की प्रक्रिया के साथ जुड़कर संभावनाओं को तलाशना होगाः योगी आदित्‍यनाथ

गोरखपुरः मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने कहा कि हमें विकास की प्रक्रिया के साथ जुड़कर संभावनाओं को तलाशना होगा. टूरिज्‍म और क्षेत्र में रोजगार के अवसर सुलभ कराने होंगे. सर्विस सेक्‍टर में अपार संभावनाएं मौजूद है. प्रक‍ृति की कृपा कहीं पर कम और कहीं पर ज्‍यादा हुई है. लेकिन, पूर्वांचल इस दृष्टि से बहुत ही समृद्धशाली है. हर एक तबके के व्‍यक्ति को आगे आकर विकास में सहभागी बनना होगा. युवाओं को सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी नहीं है. ऐसे में कैसे उम्‍मीद करते हैं कि हमारा युवा अपना खुद का स्‍टार्टअप स्‍टार्ट कर सके और आगे बढ़ सके.

मुख्यमंत्री नियोजन विभाग और दीनदयाल उपाध्‍याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में “पूर्वांचल के सतत विकास:मुद्दे, रणनीति व भावी दिशा” विषय पर आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार व संगोष्ठी के समापन समारोह में बोल रहे थे. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि राज्य में पिछले तीन साल में इंसेफेलाइटिस नियंत्रण के लिए किए गए समन्वित प्रयासों का अनुभव वैश्विक महामारी कोरोना को काबू करने के काम आया. इसकी सराहना के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन को भी विवश होना पड़ा. इन्हीं अनुभवों के आधार पर हमें पूर्वांचल के सतत और समग्र विकास की कार्ययोजना बनानी होगी जिसमें सभी संस्थाओं को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए समन्वित योगदान देना होगा.

 

सीएम योगी ने कहा कि 1977 से लेकर 2017 तक इंसेफेलाइटिस के चलते पचास हजार से अधिक मौतें हुईं. राज्य के 38 जिले इससे प्रभावित थे. 2017 में हमारी सरकार ने इसे काबू में करने को कोई अतिरिक्त बजट नहीं दिया. बल्कि स्वास्थ्य विभाग को नोडल बनाकर अन्य कई विभागों के समन्वित प्रयास से महज तीन साल में इस पर नियंत्रण पा लिया. ठीक इसी प्रकार के प्रयास पूर्वांचल के विकास को लेकर किए जा सकते हैं. लक्ष्य स्पष्ट हो तो बजट और मैन पॉवर की समस्या बाधक नहीं बनती. चुनौतियों में ही मार्ग निकालना होगा. उन्होंने कहा कि पूर्वांचल में प्रकृति और ईश्वर की विशेष कृपा है. दुनिया की सबसे उर्वर भूमि और सबसे अधिक मीठा जल हमारे पूर्वांचल में है, लेकिन जब हम अतिरिक्त प्रयास छोड़ देते हैं तो प्रतिस्पर्धा में पीछे छूट जाते है.

विरोधी जब आपके खिलाफ बोलते हैं तो मानिए कि हम कुछ कर रहे हैं. सीएम योगी ने कहा कि कुछ लोगों की नकारात्मक सोच से पूर्वांचल गरीबी व पिछड़ेपन का शिकार रहा. मुख्यमंत्री ने कहा कि तीन दिवसीय इस मंथन में निकले निष्कर्ष पर नीति बनाने के लिए मंत्रिमंडलीय उप समिति बनाई जाएगी. आने वाले समय में पूर्वांचल में आर्थिक विकास के साथ सामाजिक उन्नयन भी दिखेगा. उन्होंने पूर्वांचल के समग्र व सतत विकास के लिए नियोजन विभाग और पूर्वांचल विकास बोर्ड को इस दिशा में हर संस्था को जोड़ने को प्रेरित किया.

मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालय व अन्य शैक्षणिक संस्थान सिर्फ डिग्री देने तक सीमित न रहें. छात्रों को शासन की योजनाओं से जोड़ने के लिए भी उन्हें आगे आना होगा. शासन की नीतियों को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाना होगा. सैद्धांतिक के साथ कार्य के व्यावहारिक पक्ष को भी बताना होगा, तभी आत्म निर्भर भारत की परिकल्पना साकार होगी. उन्होंने शिक्षण संस्थानों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के असली मन्तव्य को समझने और तदनुसार अमल करने का सुझाव भी दिया.

सीएम योगी ने कहा कि क्षेत्र की समस्याओं का समाधान स्थानीय स्तर पर ही निकालना होगा. उन्होंने कहा कि अयोध्या में 2017 में जब पहली बार दीपोत्सव हुआ तो 51 हजार दीये पूरे प्रदेश से जुटाने पड़े. हम दीयों व मूर्तियों के लिए चीन पर निर्भर हो गए थे. जबकि यहां सबकुछ मौजूद था. कोरोना काल में चीन पर निर्भरता खत्म हुई, माटी कला को बढ़ावा मिला तो इस बार हर घर मिट्टी के दीये जले. अयोध्या के दीपोत्सव में सात लाख दीये जगमग हुए.

समापन समारोह के विशिष्ट अतिथि केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीपद यशोनाइक ने कहा कि आबादी के लिहाज से देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में तेजी से विकास हो रहा है. उन्होंने कहा कि देश के विकास में उत्तर प्रदेश का अतुल्य योगदान है. उन्होंने आयुष मंत्रालय द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ावा देने का भी उल्लेख किया.

इस अवसर पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष डीपी सिंह ने सतत विकास के लिए शिक्षा को बुनियादी जरूरत बताते हुए कहा कि शिक्षा स्थानीय आवश्यक के अनुसार, सामाजिक सरोकार वाली राष्ट्रीय महत्व की तथा वैश्विक माहौल के अनुकूल होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि पूर्वांचल विशेषताओं से समृद्ध है और इसके जरिये विकास को नया आयाम दिया जा सकता है.

राज्‍यसभा सांसद जय प्रकाश निषाद ने कहा कि पूर्वांचल के सतत विकास को गति देने के लिए इस सेमिनार का आयोजन किया गया. उन्‍होंने कहा कि मुख्‍यमंत्री योगी आद‍ित्‍यनाथ का ये प्रयास है कि पूर्वांचल के विकास को गति दी जाए. उन्‍होंने बहुत तह तक जाकर जमीनी स्‍तर पर पूर्वांचल को आगे बढ़ाने की सोच पैदा की है. कई अनुभवी लोगों का विचार लेकर हर क्षेत्र में विकास का रास्‍ता खोला है. आने वाले समय में छोटे-छोटे उद्यमियों को बड़े पटल पर ले जाने के साथ किसानों की फसल के मिलने वाले दाम को दोगुना करने की योजना है. टेराकोटा और कालानमक चावल के निर्यात को बढ़ावा देंगे. निश्‍िचत रूप से इस सोच के साथ पूर्वांचल तेजी से आगे बढ़ेगा.

कुलपति प्रो. राजेश सिंह ने कहा कि इस सेमिनार/वेबिनार को सम्‍पन्‍न करने में सबसे सरकार का बड़ा योगदान रहा है. इतने सारे मंत्री और सेक्रेटरी लेवल के अधिकारी इसमें सम्मिलित हुए हैं. सरकार का पूर्वांचल के लिए कुछ करने का संकल्‍प है. इसका माध्‍यम हम बन रहे हैं. 14 से 15 मंत्री आज और कल जुड़े थे. इससे ज्‍यादा प्रमुख सचिव और 14 से 15 वीसी और कई प्रोफेसर जुड़े रहे. इसमें एक संदेश ये भी था कि पूर्वांचल से जुड़े हुए देश और विदेश के लोगों को साथ लाकर एक मॉडल बनाया जाए. वो मॉडल तैयार है. इसमें विभिन्‍न मुद्दे हैं. इस पर चर्चा होगी.

स्वागत संबोधन करते हुए प्रमुख सचिव नियोजन आमोद कुमार ने संगोष्ठी का सारांश प्रस्तुत किया. उन्होंने बताया कि पांच सेक्टर में हुए 45 तकनीकी और 8 विशेष सत्रों में कृषि, श्रम शक्ति, शिक्षा, जल प्रबंधन, उद्योग आदि के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण अनुशंसाएं मिली हैं. समापन समारोह की अध्यक्षता गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो राजेश सिंह ने की.

इस अवसर पर पूर्वांचल विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष दयाशंकर मिश्र दयालु, नरेंद्र सिंह, मुख्यमंत्री के आर्थिक सलाहकार डॉ केवी राजू, राज्य सभा सदस्य जय प्रकाश निषाद आदि भी मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन गोरखपुर विश्वविद्यालय में रक्षा अध्ययन विभाग के प्रो हर्ष कुमार सिन्हा ने किया.