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शिवपाल यादव को करीब लाकर वोट सहेजने की कोशिश में जुटे अखिलेश, नए गठबंधन के संकेत

समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने चाचा शिवपाल सिंह यादव को अपनी सरकार बनने पर कैबिनेट मंत्री बनाने और जसवंतनगर में उनके मुकाबले किसी को न उतारने की बात कहकर यादव परिवार में एका की कोशिश कम बल्कि यादव परिवार के परंपरागत वोटों को सहेजने का जतन ज्यादा किया है।

हालांकि शिवपाल की तरफ से इस प्रस्ताव पर बहुत सकारात्मक रुख नहीं दिखाया गया है, लेकिन प्रदेश में भाजपा के विजय रथ को रोकने के लिए नए गठबंधनों के संकेत जरूर निकलने लगे हैं। हालांकि इन गठबंधनों का स्वरूप और समीकरण किस तरह का होगा, यह तो अभी भविष्य के गर्भ में है।
अखिलेश का यह बयान और बसपा सुप्रीमो मायावती का प्रदेश अध्यक्ष को बदलना यह बताने के लिए पर्याप्त है कि उपचुनाव के नतीजों ने भाजपा विरोधी दलों में भविष्य को लेकर अकुलाहट पैदा कर दी है। नतीजतन सपा मुखिया पार्टी संरक्षक मुलायम सिंह यादव के परंपरागत वोटों में बिखराव रोकना चाह रहे हैं तो मायावती अति पिछड़ों को साथ जोड़कर आगे की सियासत करना चाहती हैं।